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VINDHAYACHAL NAGARI विंध्याचल नगरी एक सुविचार

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भारत वर्ष की पावन भूमि में ऐसे ऐसे चमत्कार हुए हैं । कि सधारण मनुष्य को विश्वास ही नहीं होता है, की ऐसा भी होता है ।पर यह अक्षरशः सत्य है ।जो धटनाए आज धटती है वो कल  कहानी हो जाती है । एक पुर्व काल की अद्भुत घटना को छूता यह सुविचार  आप लोगों को अच्छा लगेगा ।इस प्रसंग में हम मां विंध्यवासिनी के  प्रार्दुभाव की कथा सुनाएगे ।और उनके पावन धाम विंध्याचल नगरी के दर्शन कराएंगे ।                                                यह  घटना उस समय की है जब दुष्ट कंस के   अत्याचार से  मां पृथ्वी   रसातल को  प्रस्थान करने को मजबूूूर हो गई । तब पृथ्वी नाथ कमल नयन भगवान श्री हरि विष्णु ने उन्हें आश्वासन  दिया" हे देवी आप चिंता मत करो मैैं शीघ्र   पृथ्वी पर अवतार लेने वाला हूं   ।और आप के पाप भार को कम करने वाला हूं ।  जब  भगवान श्री हरि विष्णु भगवान श्रीकृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतार लेने वाले थे...

EBADAT A-- ELAHI इबादत ए--इलाही RILIGIOUS STORY

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अल्लाह ईश्वर तेरो नाम सबको सन्मति दे भगवान  ये पंक्तियां किसने लिखी यह तो नहीं मालूम पर इतना जरूर मालूम है कि ईश्वर एक है । हमारे मानने के पुकारने के तरीके भिन्न भिन्न हो सकते हैं । हमारे विचार भिन्न-भिन्न हो सकते हैं । हमारे बुजुर्ग हमसे ज्यादा होशियार थे । उन्होंने जो कोई भी कार्य किया  वो सोच समझ के किया । यह दांस्ता एक ऐसे शख्स का है  जो  पांच वक्त के नमाज़ी  थे ।और अपने अल्लाह से बेइंतहा प्यार करते थे ।                        कमाल अहमद नाम के एक शख्स अपने बाल बच्चों के साथ खुुशी खुशी रह रहे थे । काफी मेहनत कश इंसान थे ।उनका परिवार बहुत छोटा था उनकी बीबी और दो बच्चों के अलावा उनके परिवार मेें कोई नहीं था । उनकी बीबी सलमा  बेेेगम भी एक बहुत ही नेक और धार्मिक प्रवृत्ति की महिला थी ।                  कमाल अहमद भी काफी धार्मिक प्रवृत्ति के इंसान थे और पांच वक्त के  नमाज़ी थे । और अल्लाह से बेइंतहा प्यार करते थे ।उनकी इबादत के लिए हमेशा तत्पर रह...

EK ADBHUT VART KATHA एक अद्भुत व्रत कथा A RELIGIOUS STORY

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मातृत्व शक्ति के सामने  दुनिया में ऐसी  कोई शक्ति नहीं जो मातृत्व की बराबरी कर सके । मातृ दिवस की इस पावन त्योहार पर समर्पित यह  व्रत कथा जिसका  जन्म माता गिरजा  के कारण हुआ और विश्व में प्रसिद्ध हुआ । श्रृष्टि के बाद दो ही धर्म स्थल थे । एक शिवालय और दुसरा गिरजाघर भगवान शंकर जी ने अपनी पत्नी को बराबरी का दर्जा दिया ।और अर्धनारीश्वर कहलाएं । उन्होंने  पुरूवोत्तर दिशा मे स्वंय , पश्चिमोत्तर में मां गिरजा  को प्रधानता दी ।इस लिए पुरूवोत्तर में शिवालय और पश्चिमोत्तर में  गिरजाघर प्रसिद्ध हुए ।(जिन्हें आज चर्च के नाम से जाना जाता है )   यह व्रत सब तरह से मंगल कारी और सभी के हर तरह की समस्या को दूर करने वाला है ।                              बहुत समय पहले एक धर्मी राजा ने एक बहुत ही रमणीय  शिवालय का निर्माण करवाया ।  उस शिवालय की यह विशेषता थी कि उसके आकर्षण से प्रभावित होकर नर ,नारायण, देेव, दानव कोई भी मोहित हुए बिना नहीं रह सका । वह शिवालय इतना प्रसिद्ध...

YOGIRAJ KRISHNA --2 योगीराज कृष्ण --2 एक सुविचार

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योगीराज कृष्ण  प्रसंग कुछ अधिक हो रहा था , इस लिए  योगीराज कृष्ण--2  की रचना करना पड़ा । वैसे तो प्रभु भगवान श्रीकृष्ण के अवतार लेने के कई कारण थे ।पर ये दो कारणों का विशेष उल्लेख लोक कथाओं में चर्चित है । एक कारण तो आप सभी ने योगीराज कृष्ण में पढ़ लिया अब दुसरा महत्त्वपूर्ण कारण हम लोग इस रचना में पढ़ेंगे ।इस के लिए हमें आपको रामायण काल की   एक घटना से अवगत कराना होगा ।                                                       मां सीता का स्वयंवर चल रहा था । कई जगह से  राजा और राजकुमार  वहां आए हुए थे ।    अपने अपने बल का प्रदर्शन  सब दिखा रहे थे ,पर शिव जी का धनुष उठाना तो दूर कोई उसे हिला ना सका । यह सब देखकर राजा जनक जी की चिंता बढ़ती चली जा रही थी ।  तब उसी सभा में   महर्षि विश्वामित्र अपने दोनों शिष्य राजकुुुुमार राम और राजकुमार लक्ष्मण  के साथ विराजमान थे । उन्हें राजा जनक ज...

YOGIRAJ KRISHNA योगीराज कृष्ण - एक सुविचार

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भगवान राम बारह  कला के अवतार थे । तो भगवान कृष्ण  सोलह कला के अवतार थे ।यानि पूर्ण  अवतार जिसे हम आज की भाषा में शत् प्रतिशत पुर्ण अवतार कह सकते हैं ।जिस तरह  हम आज शत् प्रतिशत को पुर्ण कहते हैं वैसे ही पुर्व काल में इसी पुर्णता को लोग  कहा करते थे कि यह बात सोलह आने सच है । भगवान श्री हरि विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण  का अवतार भी भगवान राम के अवतार  कि तरह नारद जी की वजह से ही हुआ था । इस सुविचार में उसी कथा का वर्णन है ।                                                                                    पुर्व काल मे  कामदेव के कारण ही महर्षि नारद जी का अपमान हुआ था । और उसी कारण उन्होंने अपने  स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु को श्रापित किया था ।उनके श्राप को पूरा करने के लिए भगवान श्री हरि विष्णु को राम के रुप मेंं अवतार ...

RAM RAJYA राम राज्य -एक सुविचार

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राम एक ऐसा नाम हैं ,जो जन जन में प्रिय है ।पुरी दुनिया के दिलों पर राज करता  एक ऐसा व्यक्तित्व ,एक ऐसा आदर्श चरित्र  जो राम ने प्रस्तुत किया है । जिसे कोई भुल नहीं सकता है । भगवान विष्णु के इस विशेष अवतार ने एक ऐसा आदर्श चरित्र प्रस्तुत किया है कि जब तक सुर्य और चांद रहेंगे ।तब तक इनके नाम की कान्ति कभी धुमिल नहीं होगी । तत्कालीन महर्षि बाल्मीकि से लेकर  बाबा तुलसीदास और कई लोगों ने अपने अपने हिसाब से इनके चरित्र को अलंकृत किया है ।                                                                               भगवान विष्णु के वैसे तो बहुत अवतार हुए हैं ।  शास्त्रों के अध्ययन से पता चलता है कि कुछ भी घटनाएं  यदि पृथ्वी पर  घटित होती हैं ,वो अकारण नहीं होती । उसका कोई न कोई कारण अवश्य होता है ।इस अवतार का अवतरण भी कई कारणों से हुआ है ।      ...

SWARUP MAHATMAYA. स्वरुप महात्म्य एक सुविचार

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जगत जननी, मां जगदम्बा,  आदि भवानी, आदि माता, आदिशक्ति,कई रुपों में पूजी जाती है । मां के हर परिस्थिति में एक नया रुप  देखने को मिलता है । मां का हर रुप मन को मुग्ध करने वाला होता है  हम आज  मां के मुख्य नौ स्वरुपों की महिमा के बारे में बात करेंगे ।                                     मां का पहला स्वरुप  मां शैलपुत्री हैं ,जो भगवान शिव जी को हमेशा के लिए अति प्रिय रही हैैं । इस स्वरुप में  मां हिमालय की पुत्री के रूप मे जन्म लेेेकर  भगवान शिव की अर्धांगिनी बनी थी । जिनकी प्रिय सवारी बैल था ।                                          मां का दूसरा स्वरुप ब्रह्मचारिणी का है ।  कहा जाता है कि नारद जी के कहने से मां  ने भगवान शिव को पाने के लिए घोर तपस्या की थी ।उनकी तपस्या इतनी कठोर थी की  सारा ब्रह्मांड डोलने लगा । तब ब्रह्मा जी ने प्रगट होकर मां...