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VIJYA AKADSHI बिजया एकादशी (एक महात्म्य कथा )

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मनुष्य की जिंदगी में अपने पुर्वजों के प्रति प्रेम  की एक अपार श्रद्धा है । हमारे जिन्दगी में आज जो कुछ भी प्रकृति ने प्रदान किया है । उनमें हमारे पुर्वजों का बहुत बड़ा योगदान रहा है । उनके प्रति हमारी भी कुछ जिम्मेदारियां  होती है जिनका सही ढंग से उपयोग करने पर हमारा जीवन सुखमय होता है और अपने पूर्वजों से  हमें दुआ मिलती रहती है ।किस तरह से उनका भी कल्याण हो इस महात्म्य में इसका वर्णन किया गया है ।                    जिन मां बाप ने  हमें बड़े ही परिश्रम से,बड़े ही कष्ट से हमारे जीवन को संवारा है । हमारी एक छोटी सी मुस्कान के लिए जिन्होंने अपनी  मुस्कान को कोई महत्व नहीं दिया ।हमें पग पग पर कोई ना कोई शिक्षा देकर ,प्यार देकर हमें बड़ा किया । देश दुनिया दारी का ज्ञान कराया । हमारी एक छोटी सी छोटी खुशियों का बखुबी से ध्यान रखा । अपने उपर किसी तरह का कोई कष्ट नहीं आने दिया । वो हमारे मां, बाप,दादा दादी या कोई प्रिय जन हमारे पूर्वज जो किसी न किसी कारण से हमें छोड़ कर इस दुनिया से प्रस्थान कर गए । प्राणों से भी प्रिय ...

YUDHISTHIR KA PASCHATAP युधिष्ठिर का पाश्चाताप A RILIGIOUS STORY

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लोक कथाओं में चर्चित यह कहानी महाभारत काल से संबंध रखती है । जिस क्षेत्र में युद्ध हुआ था, उस क्षेत्र की धरती रक्तपात से लाल हो चुकी थी । पांडवों को जीत तो मिली लेकिन उनको जीत  की खुशी रास नहीं आई  । उनका मानना था कि हम युद्ध जीत कर भी हार गये है । अपने हाथों किए गये  इस जघन्य पाप से मुक्ति मार्ग चाहते थे ।                                                                                एक  दिन युधिष्ठिर अपने कक्ष में बैठे गहन सोच   में डूबे हुए थे ।   उन्होंने सोचा हम लोग सब कुछ जीत कर भी सब कुछ  हार   गए ।आखिर हमारे जीने का  उद्देश्य क्या शेेष   रहा ।   इस नश्वर शरीर और कृत्रिम धन के लिए हमने अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया ।   आत्मग्लानि से सराबोर होकर उन्होंने अपने आप को सोच केेे गहरे समुद्र डाल लिया था। उन्हें दुर्योधन के स...

ADHAYATAM DARSHAN अध्यात्म दर्शन एक सुविचार

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अध्यात्म की महिमा का बखान करना मनुष्य के वश में नही है । मनुष्य के जीवन में अध्यात्म का बहुत बड़ा योगदान है । मान लीजिए हमसे कोई पुछता है "कैसे हो भाई  "तो हम जबाब देते हैं "सबकुछ ठीक ठाक है भाई ईश्वर की कृपा है ।" ऐसा हमारे मुख से निकलना  एक साधारण बात नहीं है ।कहीं न कहीं अध्यात्म से जुड़ा व्यक्ति ही ऐसा कह सकता है । इस अध्यात्म के द्वारा ही ईश्वर मनुष्य की जिंदगी में प्रवेश करताहै ।और मनुष्य का जीवन सुन्दर और सार्थक बनाता है ।                               कोई भी फैक्ट्री में मालिक खुद कोई काम नहीं करता है। उसने काम करने के लिए मैनेजर, सुपरवाइजर  रखा है । उसी तरह यह संसार ईश्वर  लिए एक फैक्ट्री के समान है । और ईश्वर  इसका मालिक है । वह स्वयं कुछ नहीं करता ‌‌‌‌ वह हमारे बीच अपना एक प्रतिनिधि भेजता है, जो उसकेेे सामान सर्व संपन्नन रहता है ।   किसी ना किसी तरह मनुष्य को यह  लगता है कि हो ना हो यह ईश्वर ही है ।वह ईश्वर द्वारा प्राप्त शक्ति का सदुपयोग करके  मन...

A THOUGHT OF HEALTH स्वास्थ्य विचार A Good Thought

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मनुष्य के जीवन में स्वास्थ्य का बहुत बड़ा महत्व है ।स्वस्थ शरीर के लिए स्वस्थ मन का होना बहुत जरूरी है ।मन तभी स्वस्थ रहेगा । जब मनुष्य कोई अच्छा काम करेगा । जब मनुष्य कोई अच्छा काम करेगा । तो अच्छे-अच्छे- विचार आयेगे । मनुष्य को स्वस्थ रहने के लिए कुछ अतिरिक्त कार्य करने पडते है ।उन्ही अतिरिक्त कार्यो की जानकारी इस विचार में दी जा  रही है ।    अच्छे  स्वास्थ्य के लिए पांच बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। खानपान,साफ- सफाई, व्यायाम, शयन और जागरण  ।                                                  खान-पान ---  स्वस्थ शरीर के लिए खान-पान  सही  होना चाहिए । स्वस्थ हेल्दी खाना  स्वास्थ्य को स्वस्थ  रखने में बहुत मदद करता है ।कम  खाएं, अच्छा और हेल्दी खाना खाएं ।भोजन को चबा चबाकर खाएं । बीच-बीच मे यदि पानी की आवश्यकता हो तो  जितना निहायत जरूरी है । उतना ही लेवें । भोजन के तुरंत  बाद कहीं बाहर न जाएं...

BHARAT HANUMAN MILAP भरत - हनुमान मिलाप A RILIGIOUS STORY

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यह कहानी रामायणिक प्रसंग पर आधारित है । परिस्थितियां भले ही विपरीत हो पर दो महावीरों का यह मिलाप कोई साधारण मिलाप नहीं था ।भरत जी के चरित्र से जुड़ीं यह कहानी लोक कथाओं में चर्चित है ।यह उस वक्त का प्रसंग है जब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने द्रोणागिरी पर्वत पर गये थे ।                                              जब हनुमान जी ने देखा कि यहां तो यह ज्ञात करना बहुत ही मुश्किल है कि इन वृक्षो और झाड़ियों में संजीवनी बूटी का पेड़ कौन सा है । तो वे बहुत परेेेशान  हो गए । लंकापति अपने माया जाल से पुरे  द्रोणागिरि पर्वत को भ्रमित कर दिया था ।ताकि हनुमान जी बूूूटी ना पा सके  और समय से ना पहुंचे तो लक्ष्मण जी को वे लोग बचा ना सके‌।बल और बुद्धि के अग्रणी हनुमान जी तो  बिना विलम्ब किए ,समय से  लंका पहुंचना चाहते थे । उन्होंने पुरा द्रोणा गिरी पर्वत को उखाड़ लिया और लंंका की ओर  चल पड़े ।                    ...

MAA JANKI KA VANGAMAN मां जानकी का वनगमन A RILIGIOUS STORY

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यह रामायण  का एक बहुत ही  मार्मिक प्रसंग है ।जो तत्कालीन महर्षि वाल्मीकि द्वारा लिखित प्रसंग है ।मां जानकी को निर्दोष होते हुए भी वन गमन की सजा दी गई थी । राजा राम ने राजधर्म से मजबूर हो कर मां जानकी को यह सजा दी थी । हम उसी प्रसंग का उल्लेख इस कहानी में करने जा रहे हैं । इस प्रसंग में कई तरह की भ्रांतियां हैं । पर यह  कहानी लोक कथाओं में चर्चित है ।                             ऐसा कोई पहला दिन न था कि मां जानकी अपने पति  को दरबार के  काम काज से परेेेेशान ना देखा  हो । पर उस  दिन उनके पति  राजा राम के चेहरेे पर एक अजीब तरह की परेशानी झलक रही थी ।  मां  जानकी ने सोचा कि हर समय की तरह इस बार भी अपनेेे पति को उनकेेे मनपसंद भोजन  कराकर  प्रसन्न कर लूंगी।                        यह सोचकर मां जानकी के कदम रसोई घर की तरफ बढ़ रहे थे ।वहां जाते ही सब रसोइयों ने मां जानकी का अभिवादन किया और हाथ जोड़कर विनती ...

BHOLENATH KI BHASM MAHIMA भोलेनाथ की भस्म महिमा A RILIGIOUS STORY

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भगवान भोलेनाथ के भस्म की महिमा अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी है ।जो मनुष्य अपने आप को भोलेनाथ का भक्त समझते हैं ।  वे भस्म की महिमा को अच्छी तरह से समझते हैं ।एक बार  भस्म की महिमा की कथा स्वंय भगवान ब्रह्मा जी ने अपने प्रिय पुत्र नारद जी को सुनाई थी  ‌‌‌। हम उसी कथा को आपके समक्ष रखने जा रहे हैं ।                           पूर्व काल में एक बामदेव नाम के शिवभक्त हुए ।  जो शिवजी  के भक्ति में इतने लीन हो गए कि उनकी प्रसिद्धि तीनो लोकों में छा गई । वे एक दिन   सुबह भ्रमण करते करते ऐसे वन में चले गए । जहां केवल भूत प्रेत रहते थे । कोई भी मनुष्य वहां आना जाना  पसंद नहीं करता था ।  वह निर्जन स्थान भूतों का गढ़ के नाम से बदनाम था । वहीं पर एक ब्रह्म राक्षस रहा करता था जो स्वभाव से बहुत ही  क्रूर था ।  जब उसने बामदेव को देखा तो बहुत प्रसन्न हुआ ।और सोचा कि आज  बहुत दिनों के बाद इतना हृस्ट पुष्ट मनुष्य मिला है ।इसको खाने मेें बहुत मज़ा आयेगा ।  यह सोचकर वह मन ही मन ...