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GURU MAHIMA गुरु महिमा A RILIGIOUS STORY

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  यह एक  ऐसा  गरिमामय पद है।  जिसके आगे  भगवान को भी झुकना  पडा ।ऋषि  सन्दीपनी के यहां  भगवान श्री कृष्ण को, और गुरू  वशिष्ठ  के  यहां  भगवान  श्री राम  को झुकना पडा  । माँ  ,पिता और गुरू  से बढ कर  दुनिया में कोई श्रेष्ठ नही है ऐसा भगवान श्री कृष्ण  ने कहा है  । ये तीन पद विधाता  ने स्वयं  बना रखे है  ,जिन्हें  संसार पुजता आया है।  यह प्रसंग कथा महाभारत काल  से लिया गया है   जिसका  उल्लेख   हम  करने जा रहे है।                          गुरु द्रोणाचार्य  का आश्रम जहां कौरवो और पांडवो  दोनों  पक्ष के राजकुमारो को शिक्षा ग्रहण के लिए  भेजा गया है।  यहां राजकुमार  युधिष्ठिर  सबसे   बड़े  भाई  है। जिनकी  इज्जत  कौरव पक्ष के  ज्येष्ठ  राजकुुुुमार   दुर्योधन  भी किया  करते है।...

VISHWASH KA FAL विश्वास का फल A RILIGIOUS STORY

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  मनुष्य का जीवन  परेशानियों  से भरा  हुआ  है।  फिर भी  मनुष्य  जरा  सा  अध्यात्म  के उपर विश्वास करले  तो उसे  बहुत राहत  मिलती है  ।यह तथ्य नैसर्गिक है  । इसी तथ्य को  दर्शाती एक कहानी का वर्णन  हम करने जा रहे है  जो लोक  कथाओ  मे प्रचलित है  ।जिसका नाम  है "  विश्वास का फल "                                          बहुत समय पहले  एक  पुुुुुुजारी  रहते  थे। एक पुराने मंदिर मे पूजा अर्चना     किया  करते  थे। उस  मंंदिर मे  भगवान  गणेेेश, भगवान  भोलेनाथ  और माता गिरजा के अलावा  राम लक्ष्मण जानकी और राधे श्याम  जी की मूर्तिया थी।   सबको श्रृंगार करना, भजन ,भोजन और महा प्रसाद ,पूजा अर्चना  प्रातः पूजा, अपरान्ह पूजा ,  संंध्या पूजा सारी सेवाएं  पुुुुुुजारी  स्व...

SHREE GANESHA-2 श्री गणेशा -२ A RILIGIOUS STORY

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  भगवान  श्री गणेश  प्रथम  पूज्य  ,बल और बुद्धि  मे अग्रणी तो है ही,माता पिता की  सन्तान  की गिनती मे भी अग्रणी  माने जाते है। सर्व  संसार मे प्रथम पूजित  श्री गणेश जी के जीवन से जुड़ी एक पुरातन प्रसंग हम इस  कहानी मे प्रस्तुत  करने जा रहे है।                                              भगवान   गणेश और भगवान   कार्तिकेय   दोनों ही  मातृ भक्त ,पितृ भक्त   है।   अपने  कुशल  कौश्लय  से  उन्होने नर और नारायण दोनों का दिल   जीत  का लिया  ।  भगवान कार्तिकेय  तो स्वभाव सेे थोड़ा  सरल है। पर गणेश, तो स्वभाव से  जरा चंचल  हैं  ।दोनो  भाई समवयस्क होने के कारण  आपस मे लडतेे झगडते  किशोरा  अवस्था सेे युवा अवस्था मे प्रवेश करने लगे।   मां देवी  गिरजा  और पिता...

SHARDHA AUR VISHWASHश्रद्धा और विश्वास A RELIGIOUS STORY

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   श्रद्धा और विश्वास   दो ऐसे शब्द है, जो हर व्यक्ति के जीवन मे एक विशेष  स्थान रखते है। । बिना  श्रद्धा और विश्वास के बिना मनुष्य का  जीवन  सुना है। इसके  कारण मनुष्य का बडा से बड़ा  कार्य  भी सुगम तरीक़े  से सम्भव  हो जाता है।  यह कहानी  महाभारत काल के उस समय की है, जब पाडंव अज्ञात वास  का समय व्यतीत  कर रहे थे।                                                                              रात्रि का समय   सभी भाई एकत्र होकर अपनेे सुुुुखद दिनो की याद के बारेे मे चर्चा  कर रहे थे। उनको आपस मे इस तरह की बात करते देेेख  बड़े   भाई  युधिष्ठिर  ने कहा,"इस तरह सुुुुखद दिनो की याद करके  सुुुखी होना और दुखद  दिनो की याद करके  दुखी होना   एक क्षत्रिय वीर को...

GOOD THOUGHT OF CHILDRENS बच्चो के लिए एक अच्छी सोच

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बच्चे  हमारे भविष्य  के  रखवाले होने के साथ साथ समाज और देश का भविष्य  भी उन पर निर्भर  होता है। ऐसे मे हमारा भी कुछ फर्ज  बनता है की हम उनकी देख भाल के  साथ साथ  कुछ अलग भी उनका ध्यान रखे।  ऐसी ही कुछ छोटी  छोटी  बातो को ध्यान मे  रखने की बात इस प्रसंग  मे की गई है ।                                                                                        आप लोगों ने सुना होगा ।  महाभारत काल मे एक  घटना घटी थी , अर्जूून  की पत्नी  देेेेवी  सुभद्रा के  गर्भ मे ही  अभिमन्यु  ने चक्रव्यूह  के युद्ध- कला   का  ज्ञान  प्राप्त कर लिया था  ।  कहने का    तात्पर्य  यह है कि शिशु काल मे  बच्चों  का दिमाग बहुत तेज रहता है...

BHAKTRAJ INDERDHUMAN भक्तराज इन्द्रधुम्न

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     पूर्व काल मे घटित  एक सुन्दर कथा जो युगो युग तक जन मानस  के हृदय  पटल पर भक्त और भगवान के बीच अनमोल अमिट  छवि बन कर रह गयी  । प्रेम की एक बेमिसाल  कथा का वर्णन  हम आज आपके  समझ रख रहे  है।                                                                            पूूूूर्वकाल मे एक बहुत ही  प्रतापी ,कर्मनिष्ठ , धर्म  परायण, राजा हुए। जिनका नाम  इन्द्रधुम्न  था। राजा  इन्द्रधुम्न एक कुुुुशल  शासक होनेे के साथ  साथ  धर्म को बहुत महत्व देते थे उनके राज्य मे प्रजा भी उनके मधुर स्वभाव  के कारण  उनसे बहुत प्रभावित  थी।  भगवान  श्री हरि विष्णु  के परम भ क्त राजा इन्द्रधुम्न पर भक्ति  का वह  नशा सवार हुुआ  की वानप्रस्थ आश्रम से पहलेे ही    राजा राज पाठ...

MATSYA AVATAR मत्स्य अवतार

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भगवान श्री हरि विष्णु के अनेक अवतार हुए उनमे मत्स्य अवतार का महात्म्य  बहुत ही शुभ कारी है। ऋषी, मुनि, साधु ,सन्त ,गौ, ब्रह्मण ,पशु ,पंछी ,नर ,नारी सभी के रक्षा के लिए  भगवान श्री हरि विष्णु  ने  कोई भी रूप धारण करने मे कभी भी संकोच नही किया है। मत्स्य अवतार की  परम शुभ कारणी कथा का वर्णन हमने  इस कथा प्रसंग मे किया है  ।                                  पुरातन काल मेे ब्रह्मा  जी ने एक दिन शुुुभ  संध्या के  समय जन कल्याण के लिए  वेदो की रचना की  ।जिन वेदो का अनुसरण  करके ऋषी, मुनि अपना जीवन  सुगम , सुन्दर और शान्तिमय ढंग  सेे बितातेे थे ।और अपनेे आहार व्यवहार से जन  मानस को  प्रभावित करते थे। जिससे जन मानस का  जीवन भी सुन्दर और सुगम रूप से व्यतित  होता था।  ऋषी, मुनियो  द्वारा प्रबचन प्रसार से जन मानस को   जीवन जी नेे की  कला मे   वृधि  होती  थी।  आपसी सहयोग औ...