Posts

BHOLENATH KI BHASM MAHIMA भोलेनाथ की भस्म महिमा A RILIGIOUS STORY

Image
भगवान भोलेनाथ के भस्म की महिमा अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी है ।जो मनुष्य अपने आप को भोलेनाथ का भक्त समझते हैं ।  वे भस्म की महिमा को अच्छी तरह से समझते हैं ।एक बार  भस्म की महिमा की कथा स्वंय भगवान ब्रह्मा जी ने अपने प्रिय पुत्र नारद जी को सुनाई थी  ‌‌‌। हम उसी कथा को आपके समक्ष रखने जा रहे हैं ।                           पूर्व काल में एक बामदेव नाम के शिवभक्त हुए ।  जो शिवजी  के भक्ति में इतने लीन हो गए कि उनकी प्रसिद्धि तीनो लोकों में छा गई । वे एक दिन   सुबह भ्रमण करते करते ऐसे वन में चले गए । जहां केवल भूत प्रेत रहते थे । कोई भी मनुष्य वहां आना जाना  पसंद नहीं करता था ।  वह निर्जन स्थान भूतों का गढ़ के नाम से बदनाम था । वहीं पर एक ब्रह्म राक्षस रहा करता था जो स्वभाव से बहुत ही  क्रूर था ।  जब उसने बामदेव को देखा तो बहुत प्रसन्न हुआ ।और सोचा कि आज  बहुत दिनों के बाद इतना हृस्ट पुष्ट मनुष्य मिला है ।इसको खाने मेें बहुत मज़ा आयेगा ।  यह सोचकर वह मन ही मन ...

A JOURNEY OF MAHAKALI CAVES एक यात्रा महाकाली गुफाओं की A JOURNEY GUIDE

Image
आप लोगों ने  महाभारत काल के पांडवों के अज्ञातवास की कई कथाएं सुनीं होगी ,पर हम आज आपको आंखों देखे कुछ स्थलो के बारे में बताएंगे ।जो अपने आप मे एक अजूबा से कम नहीं । महा भारत  काल की एक घटना जो हमारे देश की एक ऐसी ऐतिहासिक घटना है जिसका जिक्र सदियों से होता चला आ रहा है । कौरवों द्वारा अनेक तरह से सताए जाने के दौरान एक अजीब तरह की सजा उन्हें दी गई थी ।और  शर्त में एक शर्त यह थी कि यदि अज्ञातवास के दौरान आप लोगों की पहचान या जानकारी हो जाती है तो अज्ञातवास की अवधि दुगनी हो जायेगी । उन दिनों वो लोग जिस जिस  स्थान पर रहे  उनमें से एक स्थान महाराष्ट्र के  मुंबई के अंधेरी पूर्व में स्थित महाकाली केव्ज के नाम से प्रसिद्ध है ।यह कुछ और नहीं पांडवों के अज्ञातवास के समय पत्थरों को तराश कर  बनाया गया उनका आवास है ।                         यह पांडव कालीन आवास अभी मुम्बई महा नगरपालिका की देख रेख में सुरक्षित है । सैंकड़ों लोग यहां दूर दूर  से देखने के लिए आते हैं । यहां की प्राचीन गुफाओं को द...

NIDHIVAN EK ADBHUT RAHSHYA निधिवन एक अद्भुत रहस्य A RILIGIOUS STORY

Image
प्रकृति भी जिसके वश मे हो एक अद्भुत और शत प्रतिशत सत्य जो सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाते रहा है ।श्री राधाकृष्ण के इस प्रेम सन्दर्भ को  हम आप के समक्ष एक कहानी के रूप में  रख रहे हैं । निधिवन अपने आप में एक रहस्य मयी स्थान है ।जो भगवान श्री कृष्ण का सबसे प्रिय स्थान है । जहां कुछ लोगों का कहना हैैै कि प्रेम से उन्मत्त होकर  गोपियां भगवान श्री कृष्ण को ही अपना सर्वस्व मानती थी । उनसे पल भर की दूरी या देरी उनको सालों के समान लगती थी । उनकी निगाहें हमेशा चन्द्रमा के समान शीतल मन्द मन्द मुस्कान से भरे  होठों वाले ,सावन की धटायो के सदृश उनका रंग रुप ,कमल के पंखुड़ियों से भी सुंदर उनके नयन , सैकड़ों सूर्यो के तेज से भी ज्यादा तेज उनका मुख , वाणी में वो मधुरता  की कोयल भी शरमा जाये , अपने शीश पर छोटे छोटे मयुर पंख धारण किए हुए भगवान श्रीकृष्ण को ढूंढती रहती थी ।यदि वो पल भर के लिए भी दूर हो जाय तो पानी से अलग हुई मछली की तरह तड़प उठती थी ।                                ...

MAHATMA KABIR महात्मा कबीर A RILIGIOUS STORY

Image
भारत वर्ष एक ऐसा अनोखा देश है ,जहां चमत्कारों की गंगा बहती है ‌।आप सब लोग ने महात्मा कबीर के बारे में सुना ही होगा ।उन्ही के जीवन से जुड़ी कुछ धटनाए जो किताबों तक नहीं पहुंच पाई ।और लोक कथाओं में  चर्चित हो कर रह गई । उन्हीं प्रमुख घटनाओं का जिक्र इस सन्दर्भ में किया गया है ।जो संसार में घटे अजुबा से कम नहीं ।   कबीर दास जी एक महात्मा पुरूष थे । अपने जीवन काल में उन्होंने ऐसे ऐसे अद्भुत कार्य किया जो कोई साधारण  मनुष्य नहीं कर सकता है ।वे हिन्दू और मुसलमान दोनों के ही प्रिय थे  । कहा     जाता है कि उनका जन्म एक हिन्दू   परिवार मेें हुआ था और लालन-पालन एक मुस्लिम  परिवार ने किया था । उनके पिता   एक बुनकर थे । कबीर दास जी  अपने पिता के काम में हाथ बटा रहेे थे एका एक उनके दिमाग में एक  भावना  उठी कि   गुुुरू दीक्षा लेना बहुत जरूरी है ।                                      यह  सोच कर उन्होंने गुरू रा...

VIDHI KA VIDHAN विधी का विधान A RILIGIOUS STORY

Image
कुछ लोगों का कहना है कि बिना प्रभु के इच्छा के कुछ भी नहीं  हो सकता है । प्रभु ही सर्वोपरि है । इस धरती पर ऐसे ऐसे कृत्य हुए हैं । जो यह साबित करने के लिए काफी है । कि बिना  प्रभु के इच्छा के कोई भी कार्य सम्भव नहीं हो सकता । विधी के विधान को कोई  भी टाल नहीं सकता है ।लोक कथाओं में चर्चित यह कथा भी इसी विषय से सम्बंधित है ।                                   पुर्व काल में एक ऋषि थे जिनका नाम सुकृष था ।  जो बहुत ही प्रतिभावान थे । जब भी धरती पर कोई   प्रतिभाशाली  व्यक्ति  होता है ।   तो सबसे पहले स्वर्ग में उसकी  चर्चा होने लगती है ।   कि अपनी प्रतिभा के प्रभाव से कोई हमारा  स्वर्ग ना छीन लेेें ।   ऋषि सुकृष का  प्रतिभा और   ज्ञान दोनों ही चरम सीमा पर था ‌। यह     बात उस वक्त  स्वर्ग में चर्चा का मुख्य   विषय बनी हुई थी ।             बात उड़ते उड़ते हुए  देवताओं के  र...

SYSTEM OF NATURE & HUMAN प्रकृति और मानव कृत नियम A GOOD THOUGHT

Image
जिस तरह जीरो के जुड़ जाने से  एक का महत्व बढ़ जाता है ,यानी एक दस हो जाता है   वहीं फार्मूला मानव जीवन में और प्रकृति  पर भी लागू होता है ।मानव जीवन और प्रकृति के साथ यदि नियम  जुड़ जाता है । तो मानव जीवन और प्रकृति दोनों का महत्व बढ़ जाता है ।                     मानव जीवन में सिस्टम यानी नियम का बहुत महत्व है । नियम है तो हम सुरक्षित है । नियम नहीं है तो हम सुरक्षित नहीं है ।यही नियम प्रकृति के पास भी है । प्रकृति यदि नियम से चलती है तो  सब कुछ ठीक है   । वायु, पानी,खनीज, और वातावरण यह  सब कुछ सही ढंग से काम कर रहा है तो मानव जीवन में सब कुछ सामान्य रहेगा यदि प्रकृति अपना नियम तोड़ दे तो  सब कुछ असामान्य  हों जायेगा  जैसे वायु अपनी अनावश्यक  शक्ति प्रदर्शन कर दे  तो तबाही मच जायेगी । सुनामी, वायु और जल का अनावश्यक प्रदर्शन ही था । यह तो ईश्वर का बनाया हुआ एक सिस्टम यानी नियम है ।                      ...

MAHIMA MATA MAIHAR KI महिमा माता मैहर की A RILIGIOUS STORY

Image
हमारी पृथ्वी पर ऐसे ऐसे चमत्कार घटित हुए हैं ।जो अपने आप में एक मिशाल है । जिनके बारे में सोच कर मनुष्य  अचंभित हुए बिना नहीं रह सकता । इन्हीं  चमत्कारों के श्रृंखला में एक और नाम आता है ।भारत वर्ष में प्रसिद्ध एक बहुत ही पुराना मंदिर माता मैहर का एक मंदिर , जो कहा जाता है की मां के 52 शक्तिपीठो  में से एक है ।जिस मंदिर का रहस्य आज तक एक रहस्य ही बना हुआ है । मां के 52 शक्ति पीठों में से यह भी एक शक्ति पीठ माना जाता है ।कई लोगों का कहना है कि मां का हार इस जगह पर गीरा था । तबसे त्रिकुट पर्वत पर स्थित यह मंदिर  माता मैहर का मंदिर  के नाम से मशहूर है । सदियां बीत गई । मां के मंदिर की कृति में कोई फर्क नहीं पड़ा है । लोगों का कहना है कि जब मां का प्रभाव प्रकाश में आया ।  तत्कालीन राजाओं और महाराजाओं में प्रथम पूजा की एक होड़ सी लग गई । सदियों से चली आ रही इस प्रथा का अन्त महोबा के राजकुमार वीर आल्हा ने किया ।   ‌‌‌                         ‌          जो राजा...