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करिश्मा भगवान श्रीकृष्ण का ।(a motivational story)

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इस कहानी का सार यही है कि जो कुछ करता है ,वह भगवान ही करता है।मनुष्य तो केवल निमित्त मात्र है।जो व्यक्ति अपने आराध्य के शरण में विश्वास रखताहै ,उसे उसके आराध्य का आशीर्वाद प्राप्त होते रहता है।                  एक धनाढ्य व्यापारी रहता है । अपने आचरण एवं कुशल व्यवहार से वह सभी का विश्वास जीत लेता है। उसकी कार्य कुशलता से लोग उसे पसंद करते है।वह भगवान श्रीकृष्ण का परम भक्त रहता है। उसनेे अपने आप को भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में समर्पित कर दिया है।वह कोई भी काम को बहुत ही इमानदारी से करता है। इस लिए उसकी सम्पति दिन दुनी रात चौगुनी बढ़ती रहती है। ज़रूरत पड़ने पर वह दीन दुखियों की सेवा भी करता है। अनजाने में यदि कोई गलती  हो भी जाए तो वह न्याय संगत करने की कोशिश करता है।और उसमे सफल भी होता है।एक दिन एक गरीब आदमी उसके दरवाजे पर आता है। और विनय के साथ हाथ जोड़कर कहता है " सेठ जी मेरी इज्जत बचा लिजीए , मैं बेटी के शादी के चलते इतना परेशान हूं । मैं अपना सब कुछ बेच कर भी उसके ससुराल वालों को खुश नही कर पाया । मैं बहुत परेशान हूं।कृपा करके मेर...

एक बहू ऐसी भी । motivational story

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हमारी  जिंदगी का बहुत बड़ा हिस्सा हमारी क्रिया-कलापों पर आधारित है। हम चाहे तो अपनी जिंदगी स्वर्ग या नरक बना सकते है।ये सारी चीजें हमारे उपर आधारित है।ऐसी ही एक बहू की कहानी हम आपके  सामने लाने जा रहे है। आपने सुना ही होगा दुनिया गोल है। हर चीज घुम कर फिर वही आ जाती है। हमारी संस्कृति मे  एक चीज ऐसी भी हैं ।जिसे संजो कर रखा जाए तो जिन्दगी स्वर्ग के समान सुन्दर होगी।हमारी ये कहानी भी विश्व की सभी हमारी बहनों के लिए समर्पित है। मात्र इसका  अनुसरण करके हमारी बहनें अपने घर को स्वर्ग बना सकती है। ----------- एक  सीधा सादा परिवार रहता है।घर  में  मालिक , मालकिन के अलावा उनके तीन बच्चे रमेश,भावेेश और माधुरी रहती है। मालिक गुुुुलाबचंंद कपड़े का व्यापारी रहता है। बहुत ही ईमानदार ,बहुत ही अच्छा स्वभाव वाला व्यक्ति रहता है।ठीक  उसी तरह उसकी पत्नी सबिता भी एक नेक, सुशील और धार्मिक विचारों वाली औरत रहती है।वह  नित्य पुुुुजा पाठ करने के बाद ही अपने नित्य कर्म  को करती है। उसने इस  छोटे से परिवार को  बहुत ही सुझ बुुझ से संभाल कर रखी है । बच...

खुद हनुमानजी ने बचाई अपने सेवक की जांन ।---a motivational story

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खुद हनुमानजी ने बचाई अपने सेवक की जांन, इस सत्य कथा में केवल स्थान, और पात्र के नाम  बदले गए है। श्रद्धा है तो सब कुछ है।मानो तो देव‌ , नही तो पत्थर  ।ये कहानी एक प्रेरणादायक कहानी है ।जिसे पढ़ कर मन श्रद्धा से भाव विभोर हो उठेगा ।_ _हर साल की भांति इस साल भी हनुमानजी के मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया जा रहा था। मंदिर में सेवक गण अपनी अपनी सेवा में लगे थे।कोई पताका लगा रह था,तो कोई साफ-सफाई में लगाथा। कोई फूल माला से मंदिर को सजा रहा था। लाउडस्पीकर पर भक्ति गीत बज रहे थे। लोग भक्ति गानों का आनंद ले रहे थे । इतने में मंदिर का मुख्य सेवक दामोदर वहां आया,और उसने एक सेवक विवेक से कहा "एक हार और श्रीफल हनुमानजी को चढ़ा दो। "विवेक कोई काम में व्यस्त था।उसने उमेश से हार और श्रीफल चढाने को कहा।उसने भी किसी से वहीं काम करने को कहा।सब एक दूसरे को कहते गये ,किसी ने हार और श्रीफल नही चढाया।  अब हनुमानजी नाराज हो गए ।सबकुछ अपने आप बंद,कही  लाइटींग बंद तो लाउडस्पीकर बंद।सब सेवक घबरा गए । ये क्या हो गया । नगर के सब इलेक्ट्रीशियन अपना अपना दिमाग लगाकर थक ...

ये मात्र संयोग नहीं हो सकता है (एक प्रेरणादायक सत्य कथा )

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इस कहानी में हनुमानजी के द्वारा किए गए एक ऐसे कृत्य का वर्णन है।जो आपको भाव विभोर कर देगा।तो आइए इस सत्य  घटना का आनंद लेते हैं-----------मुम्बई के अंधेरी तालुका मे उपाध्याय नगर मे हनुमान जी का मंदिर बन रहा था ।नगर के कुछ अच्छे लोग श्रमदान कर रहे थे।उसमे से एक उत्साहित सेवक ने मुख्य प्रबंधन  सेवक से कहा ," प्रधान जी इतना उत्साह से मंदिर बनवा रहे हो  , उद्घाटन किससे करवावोगे  "इस पर प्रधान जी ने कहा "आप लोग ही तय  करें , उससे उद्घाटन करवायेंगे ।" इस पर  सेवक  ने हंस कर कहा "प्रधान जी आजकल भरत शर्मा व्यास जी नम्बर वन  पर है,उन्हीं से उद्घाटन करवायेंगे।" प्रधान जी ने कहा "ठीक  है ,कोशिश की जायेगी कि उन्ही  के हाथों से उद्घाटन हो,पर  वह तो बहुत बड़े स्टार गायक हैं हम उन्हें  मैनेज कर पायेंगे ।चलो ठीक है ,कोशिश करने में क्या जाता है।"एक सुंदर मंदिर का निर्माण पुरा हुआ । वहां हनुमानजी चबुतरे पर पहले से ही विराजमान थे ।उनका मंदिर बन जाने से वहां की शोभा और बढ गई। अब प्रधान जी को उद्घाटन की चिंता सताने लगी । उन्होंने कई तरह से प्रयास...

जीवन दर्शन (सत्य कथा )

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जीवन के कुछ सच्चे तथ्य को दर्शाती यह सच्ची कहानी आपको कड़वी जरूर लगेगी , लेकिन मानव जीवन का सही पथ इस कहानी में दिखाया गया है।   ‌                माथे का पसीना पोंछ कर राकेश राहत की सांस लेता है ‌‌‌।उसे अपना तारगेट पुरा करने में अभी काफी समय था ‌। अपने सहकर्मी से बोल कर वह चाय पीने केंटीन चला गया।चाय पीके आने के बाद उसने अपना काम एक घंटा पहले ही पुरा कर लिया ‌‌‌। इस बीच उसके कपड़े कितनी बार सुखे कितनी बार गीले हुए ‌। लेकिन उसनेे कोई प्रतिक्रिया न करते हुए अपना काम ख़त्म किया ।ऐसे करते करते कई साल बीत गए। राकेश  परिस्थितीयो  से उलझता हुआ ,आगे बढ़ रहा था । वह कितना भी थका मादा होता, अपने पुत्र अंश को गोद में लेते ही उसकी सारी थकान  फुर्र हो जाती ।फिर क्या ,अंश  आगे आगे और राकेश पीछे पीछे फिर घंटों तक बाप बेटे की घुड़दौड़ होती ।इस बीच भागमभाग में यदि अंश कुछ शरारत कर बैठता तो राकेश की डांट पड़ती और उस डांट का असर अंश पर कुछ नहीं पड़ता,उल्टे अपना चार दांत वाला मुशकराता  चेहरा दिखाकर राकेश को रिझाने की कोशिश करता । दौड...

DARD KISHANO KA KOI SAMAJH NAHI PÀYA दर्द किसानों का कोई समझ नही पाया । (एक प्रेरणादायक कहानी)

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दर्दकिसानों का कोई समझ नही पाया -----------------राम दयाल अपनेओसारे में बैठ कर अपने बिते हुए दिनों को सोच कर दुखी हो रहा है ,और भगवान से प्रार्थना कर रहा है कि भगवान हमारे जीवन मेें भी कभी खुशियां दे दो । खेत बुआई  का आज तीसरा दिन है,घर में सब लोग खुश हैं,आज कुछ अच्छा  खाने को मिलेगा ।रामदयाल के  चेहरे पर भी खुुशी है।इस साल फसल अच्छी होंगी ,बच्चे की पढ़ाई की बकाया फीस , मां की बिमारी का इलाज और मुन्नी की शादी का कर्ज़ सब कुछ हो जायेगा । कुछ दिन बाद फसल चहचहाने लगी ,और हंसते खेलते समय कैसे बीत गया ,मालूम ही नही पड़ा फसल तैयार हो गई । सरकारी आदमी  आकर फसल का मुयायना करके रूआब से  फरमान सुना गया "रामदयाल तुम्हारे पास आठ बिघा खेत है,एक बिघे का अनाज घर खर्च के लिए रख कर बाकी अनाज सरकारी क्रय केन्द्र के लिए आना चाहिए ।" कुछ दिन बाद फसल कटी , कुछ अनाज घर पर रखकर बाकी अनाज सरकारी क्रय केन्द्र को दे आया ।रामदयाल घर आ रहा था कि रास्ते में बनिया मिल गया ।कहने लगा"रामदयाल मेरा भी भला कर दो तुम्हारा  पिछले साल का ८०० रूपया बकाया है।सूद ब्याज लेकर १८००रूपया हो गय...

YAD EK BACHPAN KI याद एक बचपन की । A SOCIAL STORY

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इस कहानी "याद एक बचपन  की " में एक ऐसे शख्स की  पुस्तैनी दुश्मनी का जिक्र किया गया है।जिसने उस शख्स का सब कुछ छीन लिया।      एक १०साल का बालक उमेश अपने काका के यहां घुमने आया था ।नयाशहर ,नये लोग ,बालक काफी खुश था । कुछ समय बितने केबाद एक दिन अपने काकाजी के साथ झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का किला देखने गया ।काकाजी ने टिकट निकाला और दोनों अन्दर गये ।किले के अंदर रानी का शृंगार गृह , अभ्यास गृह, सैन्य गृह, घुड़साल ,हथिसार, पुजा घर, फांसी  घर और  ऐसे स्थान जो उसको बहुत अच्छे लगे ।                                                                  कुछ दिन बितने के बाद एक दिन उस बालक ने एक करूण रूदन की आवाज़ सुनी ।शाम का वक्त था, दिन और रात का मिलन हो रहा था।बालक को कुछ अजीब सा लगा। दुसरे दिन भी वही प्रतिक्रिया ,बालक से नहीं रहा गया ,उसने  अपने काकाजी से पुछ ही लिया ।"काकाजी इस तरह  कौ...